कोई मुट्टी भर ख़ुशी चाहता है /
तो कोई सारा जहाँ मांगता है //
प्यार से कट जाता है जीवन ,
मगर प्यार कोई कहाँ मांगता है /चाहे तो बन जाये देवालय दिल ,
इंसानियत मगर कोई कहाँ मांगता है /
कितना पाकर भी प्यासा रहा है मन ,
त्रप्ति मगर कोई कहाँ मांगता है /
रिश्ते नातो में कितनी दरारे बड़ी ,
अपनापन मगर कोई कहाँ मांगता है /
दिलदार हमसे बड़ा न कोई ,
मगर दिल कोई कहाँ मांगता है //